Thursday, January 21, 2016

कितनी पी कैसे कटी रात मुझे होश नहीं




कितनी पी कैसे कटी रात मुझे होश नहीं

रात के साथ गई बात मुझे होश नहीं



मुझको ये भी नहीं मालूम कि जाना है कहाँ

थाम ले कोई मेरा हाथ मुझे होश नहीं



आँसुओं और शराबों में गुजारी है हयात

मैं ने कब देखी थी बरसात मुझे होश नहीं



जाने क्या टूटा है पैमाना कि दिल है मेरा

बिखरे-बिखरे हैं खयालात मुझे होश नहीं

'राहत इंदौरी '

Wednesday, January 20, 2016

अपना ग़म लेके कहीं और न जाया जाये





अपना ग़म लेके कहीं और न जाया जाये

घर में बिखरी हुई चीज़ों को सजाया जाये 


जिन चिराग़ों को हवाओं का कोई ख़ौफ़ नहीं

उन चिराग़ों को हवाओं से बचाया जाये 


बाग में जाने के आदाब हुआ करते हैं

किसी तितली को न फूलों से उड़ाया जाये 


ख़ुदकुशी करने की हिम्मत नहीं होती सब में

और कुछ दिन यूँ ही औरों को सताया जाये 


घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूँ कर लें

किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाये

निदा फ़ाज़ली 

रोज़ तारों की नुमाइश में खलल पड़ता है





रोज़ तारों की नुमाइश में खलल पड़ता है
चाँद पागल है ..अँधेरे में निकल पड़ता है


एक दीवाना मुसाफिर है मेरी आँखों में 

वक़्त बे -वक़्त ठहर जाता  है चल पड़ता है 


अपनी ताबीर के चक्कर में मेरा जगता ख्वाब 

रोज़ सूरज की तरह घर से निकल पड़ता है


रोज़ पत्थर की हिमायत में ग़ज़ल लिखते हैं 

रोज़ शीशों से कोई काम निकल पड़ता है 


उसकी याद आई है ....साँसों ! ज़रा आहिस्ता चलो 

धडकनों से भी ....इबादत में ..खलल पड़ता है

'राहत  इन्दोरी '

Tuesday, January 19, 2016

अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझको



अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझको

मैं हूँ तेरा नसीब तो  अपना बना ले मुझको,.,


मुझसे तू पूछने आया है वफ़ा के माने

ये तेरी सादा-दिली मार ना डाले मुझको,.,


ख़ुद को मैं बाँट ना डालूँ कहीं दामन-दामन

कर दिया तूने अगर मेरे हवाले मुझको,.,


बादाह फिर बादाह है मैं ज़हर भी पी जाऊँ ‘क़तील’

शर्त ये है कोई बाहों में सम्भाले मुझको 

"क़तील "

सोचता हूँ के तुझे हाथ लगा कर देखूँ







मोम के पास कभी आग को लाकर देखूँ

सोचता हूँ के तुझे हाथ लगा कर देखूँ



कभी चुपके से चला आऊँ तेरी खिलवत में

और तुझे तेरी निगाहों से बचा कर देखूँ



मैने देखा है ज़माने को शराबें पी कर

दम निकल जाये अगर होश में आकर देखूँ



दिल का मंदिर बड़ा वीरान नज़र आता है

सोचता हूँ तेरी तस्वीर लगा कर देखूँ



तेरे बारे में सुना ये है के तू सूरज है

मैं ज़रा देर तेरे साये में आ कर देखूँ



याद आता है के पहले भी कई बार यूं ही

मैने सोचा था के मैं तुझको भुला कर देखूँ 

"राहत  इन्दोरी "